पुणे जिले में मॉनसून की तीव्रता ने पवना और मुलशी बाँधों के जलाशयों को लगभग पूर्ण क्षमता तक भर दिया है। भारी वर्षा के चलते पवना बाँध से 2,860 क्यूसेक्स से शुरू हुआ जलस्राव दोपहर तक 5,660 क्यूसेक्स और शाम तक 11,900 क्यूसेक्स तक पहुँच गया, तथा बाद में यह 15,570 क्यूसेक्स तक बढ़ गया।The Indian Express
इसी क्रम में, मुलशी बाँध से मुळा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है—रात 10 बजे तक यह मात्रा लगभग 25,400 क्यूसेक्स तक पहुंचने की संभावना है।The Indian Express+1
ये नियंत्रणयुक्त जलस्राव मध्यरात्रि से नदी के किनारेबसे इलाकों में प्रभाव दिखा सकता है। क्षेत्रीय निवासी डोमिनिक लोबो ने याद दिलाया, “2005 में पवना और मुलशी बाँधों से 45,000 क्यूसेक्स तक पानी छोड़ा गया, जिससे रिकॉर्ड बाढ़ हुई थी”—इसलिए नदीतटवासियों को निरंतर सतर्क रहने का आग्रह है।The Indian Express
अधिकारियों की तैयारियाँ और निर्देश
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के आयुक्त शेखर सिंह ने सभी आपातकालीन विभागों–स्वास्थ्य, अग्नि सुरक्षा, इंजीनियरिंग, जलापूर्ति और पर्यावरण–को सक्रिय कर रखा है। स्कूलों को अस्थायी आश्रय के लिए तैयार किया जा रहा है और ट्रैफिक नियंत्रण पुलिस सुनिश्चित कर रही है कि नदी किनारे का रहना सुरक्षित हो।The Indian ExpressPunekar News
मौसमी बीमारियों को रोकने हेतु नगर निगम के स्वास्थ्य कर्मी घर-घर फ्यूमिगेशन, दवा छिड़काव और स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। लोक सुनवाई और सूचना हेतु ऑडियो घोषणाएं भी की जा रही हैं।Punekar News
मुख्य सहायता नंबर सार्वजनिक कर दिए गए हैं:
- PCMC मुख्य कंट्रोल रूम: 020-67331111 / 020-28331111
- फायर विभाग: 7030908991
साथ ही अतिरिक्त फायर स्टेशन नंबर भी उपलब्ध हैं।The Indian Express
मौसम भविष्यवाणी और जोखिम चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पुणे जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। तेज हवाएं (40–60 किमी/घंटा) और भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। पवना, मुळा और इंद्रायणी नदियों में जल स्तर का उछाल देखा जा रहा है—इससे बाढ़ जोखिम बढ़ता जा रहा है।The Indian ExpressPunekar News
पुणे के अन्य बाँध जैसे खडाकवसला, पनशेत, वराsगाँव और टेंघर भी लगभग पूर्ण स्तर पर हैं।The Times of India+4The Times of India+4The Times of India+4
स्थानीय नागरिकों की चिंता
संगवी के निवासी डोमिनिक लोबो का अनुभव हमें यह याद दिलाता है कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है। नागरिकों की सतर्कता ही बचाव की पहली कड़ी है।
निष्कर्ष
मॉनसून की अप्रत्याशितता और बाँधों से नियंत्रित जलविमोचन खतरनाक हो सकता है, लेकिन यदि प्रशासन और नागरिक मिलकर सक्रिय रहें, समय रहते बचाव कार्य किए जाएँ, तो त्रासदी टाली जा सकती है।
नागरिकों से अनुरोध है:
- नदी किनारे न जाएँ
- चेतावनी का पालन करें
- ज़रूरत पड़ने पर तुरंत संपर्क करें


